पटना

अब नीतीश के इस दांव से पस्त हो सकते हैं विरोधी,शराबबंदी के बाद

 अब नीतीश के इस दांव से पस्त हो सकते हैं विरोधी,शराबबंदी के बाद

शराबबंदी के बाद बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने फिर से ऐसा मुद्दा उठाया है कि जिसके पीछे तमाम पार्टियों को आना पड़ सकता है. एक बार फिर जेडीयू दो ऐसे सामाजिक मुद्दे को अभियान बनाने की तैयारी में है जिसका शायद ही कोई दल विरोध करे.

शराबबंदी से मिले समर्थन से उत्साहित जेडीयू अब 2 अक्टूबर से दहेज मुक्त बिहार और बाल विवाह के ख़िलाफ़ बड़ा अभियान छेड़ने की तैयारी कर रहा है. जाहिर है ये ऐसे मुद्दे हैं, जिसका शायद ही कोई विरोध कर सके. नीतीश कुमार कई बार ऐसे फैसले लेते हैं, जो उनके सहयोगियों के साथ-साथ उनके विरोधियों को भी हैरान और परेशान कर देता है.

जेडीयू इन मुद्दों के बहाने अपने विरोधियो को भी समर्थन की मांग कर रहा है, लेकिन क्रेडिट जेडीयू को अकेले ना मिले इसकी वजह से तमाम पार्टियां अभी से ही रास्ता ढूंढने में लगी है. इतना ही नहीं विपक्ष ने जेडीयू पर इन मुद्दों बहाने राजनीति का आरोप लगा रही है.

जब मुद्दा इतना बड़ा हो तो इसका सामाजिक और राजनीतिक लाभ मिलना भी तय है. बस इसी वजह से जेडीयू जहां उत्साहित है और बाकी राजनीतिक पार्टियों को इस मुहिम में शामिल होने का आग्रह कर रहा है. लेकिन इस मुद्दे को अपना बताने से परहेज़ नहीं कर रहा है.

राजनीति में जनता से जुड़े मुद्दे को जिसने भी पहले लपका उसका राजनीतिक फायदा हमेशा उसी पार्टी को मिलता है. तभी तो जेडीयू इस मुद्दे को हर हाल में अपना बताकर इसका फायदा उठाना चाह रही है. नीतीश के सहयोगी समर्थन की बात कहते हैं, लेकिन राजद जेडीयू पर मुद्दे के बहाने राजनीति का आरोप लगाकर हमला बोल रही है.

वही कांग्रेस इन मुद्दों को अपना मुद्दा बताते हुए जेडीयू की चुटकी ले रही है और नीतीश की मंशा पर ही सवाल उठा रही है. बहरहाल सामाजिक मुद्दों के बहाने ही सही बिहार की राजनीति गरमाने वाली है. लेकिन इन मुद्दों पर राजनीति हो इस राजनीति से फ़ायदा तो बिहार की जनता को ही मिलने वाला है.

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